Wednesday, October 20, 2010

मेरी बेटू की नयी फोटो


मेरी बेटी जो अब चार महीने की हो गयी है उसकी नयी फोटो है यह.

Saturday, July 17, 2010

बिटिया एक महीने की हो गयी


इस १५ तारीख को बिटिया एक महीने की हो गयी।

Wednesday, July 7, 2010

युवा पीढ़ी पर उदय प्रकाश क्या कहते हैं.

अभी तहलका साहित्य विशेषांक आते ही वरिष्ठ और युवा पीढ़ी के बीच जो थोडा बहुत विभेद पैदा हुआ है उसमें एक चीज जो इगनोर की जा रही है वह है की आखिर इस मद में उदय प्रकाश क्या कहते है। मेरा मानना है कि हमारी पीढ़ी सबसे अधिक उदय प्रकाश और विनोद कुमार शुक्ल के नजदीक है खासकर कर शिल्प के स्तर पर। जब हम मूल्यों के स्तर की बात करें तब तो इस जनवादिता, जागरूकता को प्रेमचंद से लेकर रेनू ,ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह, संजीव किन्ही से भी जुडी हुई महसूस की जा सकती है लेकिन यहाँ मैं बात सिर्फ फॉर्म की कर रहा हूँ। मेरा तेहेल्का में जो स्टेटमेंट है वह इसी मद में है। अक्टूबर २००९ में आउटलुक ने पाठ साहित्य सर्वे नमक एक विशेषांक निकाला था जिसमें वरिष्ठ कवी केदार जी और उदय जी के बीच एक जरुरी बातचीत है। उस बातचीत में केदार जी ने उदय जी से युवा पीढ़ी से अपने सम्बन्ध के बारे मैं बात की है। फिर उदय जी का जबाब है ''हो सकता है, बनावट अलग हो पर समानताएं बहुत हैं। शायद इसीलिए इस पीढ़ी से अच्छा संवाद बन सका है। बीच में ५-८ साल जरुर थे जब कुछ पत्रिकाओं ने कुछ ख़ास लोगों को प्रोमोट करना शुरू किया था। पर अब वह दौर बीत चूका है।'' अभी जो विवाद चल रहा है उसमें उदय जी के इस जबाब को भी जरुर देखा जाना चाहिए।

Saturday, June 26, 2010

ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी

अभी तहलका के साहित्य विशेषांक में एक छोटी सी कहानी आई है ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी। कुछ अलग हटकर कहानी लिखने की कोशिश की है हो सके तो जरुर देखें.

Thursday, June 24, 2010

श्रेष्ठ हिंदी कहानियां


इस वर्ल्ड बुक फिर पर पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस के द्वारा आजादी के बाद की श्रेष्ठ हिंदी कहनियों के चयन की योजना बनायीं। इस पूरी योजना की जिम्मेदारी वरिष्ठ आलोचक कमला प्रसाद ने ली। हर दशक के अलग अलग संपादक बनाये गए। १९५० से यह २०१० तक हर दशक की कहानियों की यात्रा है। कमला जी ने १९९०-२००० के दशक की जिम्मेदारी मुझे और ज्योति चावला को संयुक्त रूप से दी। इसमें क्रमशः खगेन्द्र ठाकुर, स्वयं प्रकाश, केवल गोस्वामी, लीलाधर मंडलोई, उमा शंकर चौधरी , ज्योति चावला और कमला प्रसाद संपादक हैं। यहाँ मैं अपने दशक वाले अंक का कवर लगा रहा हूँ।

बिटिया की छोटी सी तस्वीर


अभी १५ जून को एक प्यारी सी बिटिया हुई है उसकी एक छोटी सी तस्वीर यहाँ दे रहा हूँ।

दलित विमर्श की दूसरी पुस्तक


दलित विमर्श वाली दूसरी पुस्तक का कवर यह है।

दलित विमर्श पर पुस्तकें


मैंने दलित विमर्श पर दो पुस्तकों का संपादन किया है। मैंने हर संभव कोशिश की है की दलित विमर्श से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण लेखों को इसमें शामिल कर लूँ। इन किताबों का प्रकाशन अनामिका पब्लिशर दिल्ली ने किया है। यहाँ मैं दोनों किताबों का कवर दे रहा हूँ।

कविता संग्रह का कवर


मेरे कविता संग्रह का यह कवर है।