Saturday, June 26, 2010

ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी

अभी तहलका के साहित्य विशेषांक में एक छोटी सी कहानी आई है ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी। कुछ अलग हटकर कहानी लिखने की कोशिश की है हो सके तो जरुर देखें.

3 comments:

  1. नमस्कार उमाशंकर जी, "ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी" कल ही पढ़ी. कहानी अच्छी बनी है. समय के साथ-साथ उसमें बदलाव तो आता ही है. बधाई. पुखराज जांगिड़.

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  2. "यहाँ सिर्फ साहित्य है और कुछ जिंदगी" बेहद खुबसूरत पंक्तियाँ चुनी है आपने अपने ब्लाग के शीर्षक के साथ, उसे अभिव्यक्त करने के लिए. दरअसल दोनों एक-दूजे को समझने के सबसे विश्वसनीय उपादान है. पुखराजजांगिड़.

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  3. makkhi jordaar hai aise makkhiyon maccharon ko meri shubhkaamnaayen sudha upadhyaya

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