अभी तहलका के साहित्य विशेषांक में एक छोटी सी कहानी आई है ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी। कुछ अलग हटकर कहानी लिखने की कोशिश की है हो सके तो जरुर देखें.
"यहाँ सिर्फ साहित्य है और कुछ जिंदगी" बेहद खुबसूरत पंक्तियाँ चुनी है आपने अपने ब्लाग के शीर्षक के साथ, उसे अभिव्यक्त करने के लिए. दरअसल दोनों एक-दूजे को समझने के सबसे विश्वसनीय उपादान है. पुखराजजांगिड़.
नमस्कार उमाशंकर जी, "ललमुनिया मक्खी की छोटी सी कहानी" कल ही पढ़ी. कहानी अच्छी बनी है. समय के साथ-साथ उसमें बदलाव तो आता ही है. बधाई. पुखराज जांगिड़.
ReplyDelete"यहाँ सिर्फ साहित्य है और कुछ जिंदगी" बेहद खुबसूरत पंक्तियाँ चुनी है आपने अपने ब्लाग के शीर्षक के साथ, उसे अभिव्यक्त करने के लिए. दरअसल दोनों एक-दूजे को समझने के सबसे विश्वसनीय उपादान है. पुखराजजांगिड़.
ReplyDeletemakkhi jordaar hai aise makkhiyon maccharon ko meri shubhkaamnaayen sudha upadhyaya
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