Wednesday, July 7, 2010

युवा पीढ़ी पर उदय प्रकाश क्या कहते हैं.

अभी तहलका साहित्य विशेषांक आते ही वरिष्ठ और युवा पीढ़ी के बीच जो थोडा बहुत विभेद पैदा हुआ है उसमें एक चीज जो इगनोर की जा रही है वह है की आखिर इस मद में उदय प्रकाश क्या कहते है। मेरा मानना है कि हमारी पीढ़ी सबसे अधिक उदय प्रकाश और विनोद कुमार शुक्ल के नजदीक है खासकर कर शिल्प के स्तर पर। जब हम मूल्यों के स्तर की बात करें तब तो इस जनवादिता, जागरूकता को प्रेमचंद से लेकर रेनू ,ज्ञानरंजन, काशीनाथ सिंह, संजीव किन्ही से भी जुडी हुई महसूस की जा सकती है लेकिन यहाँ मैं बात सिर्फ फॉर्म की कर रहा हूँ। मेरा तेहेल्का में जो स्टेटमेंट है वह इसी मद में है। अक्टूबर २००९ में आउटलुक ने पाठ साहित्य सर्वे नमक एक विशेषांक निकाला था जिसमें वरिष्ठ कवी केदार जी और उदय जी के बीच एक जरुरी बातचीत है। उस बातचीत में केदार जी ने उदय जी से युवा पीढ़ी से अपने सम्बन्ध के बारे मैं बात की है। फिर उदय जी का जबाब है ''हो सकता है, बनावट अलग हो पर समानताएं बहुत हैं। शायद इसीलिए इस पीढ़ी से अच्छा संवाद बन सका है। बीच में ५-८ साल जरुर थे जब कुछ पत्रिकाओं ने कुछ ख़ास लोगों को प्रोमोट करना शुरू किया था। पर अब वह दौर बीत चूका है।'' अभी जो विवाद चल रहा है उसमें उदय जी के इस जबाब को भी जरुर देखा जाना चाहिए।

2 comments:

  1. उदय जी की कोई भी बात महत्वपूर्ण है. इस विषय पर और लिखें, उदय जी के दृष्टिकोण को लेकर, उत्सुकता है.

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  2. नई पीढ़ी पर उदय प्रकाश और विनोद कुमार शुक्ल की छाप हर जगह दिखती है। और युवा लेखकों को यह समझने की जरूरत है कि यह किसी तरह से काबिल-ए-एतराज बात नहीं है। जिन्होंने साहित्य इतिहास पढ़ा होगा वो जानते हैं कि ऐसा होता रहा है।

    उदय प्रकाश क्या कहते हैं यह सुनने/जानने के लिए हम जैसे पाठक सदैव बेचैन रहते हैं।

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